आज हम ऐक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के ऊपर बात करने जा रहे हे जिसका शीर्षक हे येशु के लहू के द्वारा जयवंत जीवन को पाना।
यदि आज हम इस संसार में देखे तो सब लोगो को एक जयवंत जीवन जीना हे, लेकिन कइ बार लोग संसार में असफल और निराश हो जाते हे, जिसकी वजह से वह अपने जीवन का जो आनंद हे उसे ठीक तरीके से नहीं ले पाते हे और परीणाम स्वरूप वे लोग कइ सारी बातो को और अपने जीवन को अंधकारमय ओर अस्तव्यस्त पाते हे।
प्रकाशित वाक्य १२:११ में लिखा हे, और वे मेम्ने के लोहू के कारण, और अपनी गवाही के वचन के कारण, उस पर जयवन्त हुए, और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली।
यहाँ पर वचन हमें २ चीजों को बताता हे जिसके कारणवश हम जयवंत हो सकते हे।
१. मेम्ने के लोहू के कारण
२. अपनी गवाही के वचन के कारण
यदि आप भी उस वचन की गवाही को और मेम्ने अर्थात येशु मसीह के लोहू की सामर्थ को अपने जीवन मे कार्य करने दे तो आप भी एक जयवंत जीवन को जी सकते हे।
जब हम उस मेमने अर्थात येशु के लहू के द्वारा नियमित अपने आप को शुद्ध करते हे, तो धीरे धीरे येशु का स्वभाव जैसे की दीनता नम्रता प्रेम हमारे जीवन मे आता हे और हम जीवन मे आगे बढ़ते जाते हे और हम मसीह मे एक नइ सृष्टि बन जाते हे।
संक्षेप में प्रभु येशु मसीह के लोहू में एक अनोखी शक्ति हे जो हमें शैतान संसार और पाप के कारण आने वाली सभी बातो और परीक्षाओ के ऊपर जयवंत होने के लिए हमारी सहायता कर सकती हे।
प्रकाशित वाक्य १४:१ में लिखा हे, फिर मैंने देखा कि मेरे सामने सिय्योन पर्वत पर मेमना खड़ा है। उसके साथ ही एक लाख चवालीस हज़ार वे लोग भी खड़े थे जिनके माथों पर उसका और उसके पिता का नाम अंकित था।
यहा पर यूहन्ना ने देखा की मेमना अर्थात येशु मसीह सियोन पर्वत पर खडे हे और वह एकेले नहीं हे पर उनके साथ १४४००० और भी लोग हे जो उनके साथ खडे हुऐ हे।
वचन हमें स्पष्ट बताता हे की जिसके माथे पर उसका अर्थात मेमने येशु मसीह का और पिता का नाम अंकित था उन्ही लोगो को यूहन्ना ने येशु के साथ सिय्योन पर्वत पर खड़े हुवे देखा।
यदि आप येशु के साथ खड़े रहना चाहते हे तो आप भी उस मेमने के समान अर्थात येशु के समान अपने आप को मृत्यु के दिन तक नम्रता से उसके साथ चले तभी आप अंत के दिनो में येशु मसीह के साथ खड़े रह पाएंगे।
और प्रकाशित वाक्य १२:११ हमें यही बताता हे के जो लोग जयवंत हुऐ यह वही लोग हे जिन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना, यहां तक कि मृत्यु भी सह ली।
१ यूहन्ना १:७ किन्तु यदि हम अब प्रकाश में आगे बढ़ते हैं क्योंकि प्रकाश में ही परमेश्वर है - तो हम विश्वासी के रूप में एक दूसरे के सहभागी है, और परमेश्वर के पुत्र यीशु का लहू हमे सभी पापों से शुद्ध कर देता है।
इस वचन के अनुसार जब हम प्रकाश में अर्थात परमेश्वर में आगे बढ़ते हे और एक दूसरे की नींदा या बुराई करने के बजाय जब हम उनके साथ विश्वासी के रूप में सहभागी बनते हे यानी उनके जीवन का एक महत्वपुर्ण हिस्सा बन जाते हे तब परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह का लहू हमें सभी पापों से शुद्ध कर देता हे।
यदि आप चाहते हे के येशु का लोहू आपको शुद्ध करे तो आपको एक विश्वासी होने के नाते इन सब बातो का ध्यान रखना होगा और यह सब विश्वासी लोगो की आत्मिक और नैतिक जिम्मेदारी हे।
ब्लॉग पढ़ रहे सभी को परमेश्वर आशीष और अनुग्रह दे।
Amen praise the Lord
ReplyDeleteThank you
ReplyDeleteParise the lord hallelujah in the Thanks Jesus
ReplyDeletethank you amen
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