आज हम ऐक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के ऊपर बात करने जा रहे हे जिसका शीर्षक हे येशु के लहू के द्वारा जयवंत जीवन को पाना। यदि आज हम इस संसार में देखे तो सब लोगो को एक जयवंत जीवन जीना हे , लेकिन कइ बार लोग संसार में असफल और निराश हो जाते हे , जिसकी वजह से वह अपने जीवन का जो आनंद हे उसे ठीक तरीके से नहीं ले पाते हे और परीणाम स्वरूप वे लोग कइ सारी बातो को और अपने जीवन को अंधकारमय ओर अस्तव्यस्त पाते हे। प्रकाशित वाक्य १२:११ में लिखा हे , और वे मेम्ने के लोहू के कारण , और अपनी गवाही के वचन के कारण , उस पर जयवन्त हुए , और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना , यहां तक कि मृत्यु भी सह ली। यहाँ पर वचन हमें २ चीजों को बताता हे जिसके कारणवश हम जयवंत हो सकते हे। १. मेम्ने के लोहू के कारण २. अपनी गवाही के वचन के कारण यदि आप भी उस वचन की गवाही को और मेम्ने अर्थात येशु मसीह के लोहू की सामर्थ को अपने जीवन मे कार्य करने दे तो आप भी एक जयवंत जीवन को जी सकते हे। जब हम उस मेमने अर्थात येशु के लहू के द्वारा नियमित अपने आप को शुद्ध करते...
आध्यात्मिक मार्गदर्शन