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येशु के लहू के द्वारा जयवंत जीवन

आज हम ऐक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के ऊपर बात करने जा रहे हे जिसका शीर्षक हे येशु के लहू के द्वारा जयवंत जीवन को पाना। यदि आज हम इस संसार में देखे तो सब लोगो को एक जयवंत जीवन जीना हे , लेकिन कइ बार लोग संसार में असफल और निराश हो जाते हे , जिसकी वजह से वह अपने जीवन का जो आनंद हे उसे ठीक तरीके से नहीं ले पाते हे और परीणाम स्वरूप वे लोग कइ सारी बातो को और अपने जीवन को अंधकारमय ओर अस्तव्यस्त पाते हे।   प्रकाशित वाक्य १२:११ में लिखा हे , और वे मेम्ने के लोहू के कारण , और अपनी गवाही के वचन के कारण , उस पर जयवन्त हुए , और उन्होंने अपने प्राणों को प्रिय न जाना , यहां तक कि मृत्यु भी सह ली। यहाँ पर वचन हमें २ चीजों को बताता हे जिसके कारणवश हम जयवंत हो सकते हे। १.   मेम्ने के लोहू के कारण २.   अपनी गवाही के वचन के कारण यदि आप भी उस वचन की गवाही को और मेम्ने अर्थात येशु मसीह के लोहू की सामर्थ को अपने जीवन मे कार्य करने दे तो आप भी एक जयवंत जीवन को जी सकते हे।     जब हम उस मेमने अर्थात येशु के लहू के द्वारा नियमित अपने आप को शुद्ध करते...

अब्राम के पिता तेरह के जीवन से हम क्या महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हे?

तेरह का जीवन और महत्वपूर्ण सबक। आज हम तेरह के जीवन से महत्वपूर्ण सबक सीखेंगे ; अब्राम के पिता का नाम तेरह था और तेरह का अर्थ है देरी   करना। अगर हमारा स्वभाव देरी करने का है तो हम अपने जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएगे , और जहा परमेश्वर हमे ले जाना चाहते हैं वहा हम नहीं पहुंच पाएगे। उत्पत्ति 11: 31-32 और तेरह अपना पुत्र अब्राम , और अपना पोता लूत , जो हारान का पुत्र था , और अपनी बहू सारै , जो उसके पुत्र अब्राम की पत्‍नी थी , इन सभी को लेकर कसदियों के ऊर नगर से निकल कनान देश जाने को चला ; पर हारान नामक देश में पहुँचकर वहीं रहने लगा। जब तेरह दो सौ पाँच वर्ष का हुआ , तब वह हारान देश में मर गया। यहां हम परमेश्वर की 3 इच्छा के बारे में सीखते हैं। 1. परमेश्वर की पहली इच्छा यह थी की वह नहीं चाहता थे कि तेरह कसदियों के नगर ऊर में रहे। 2. परमेश्वर की दूसरी इच्छा यह थी की वह तेरह को कनान देश में ले जाना चाहता थे। 3. परमेश्वर की तीसरी इच्छा यह थी की तेरह उस हारान   देश पर अपना मन   न लगाए जो कनान की और जाते समय रास्ते में आता था। मेरे प्यारे भाइ और ...

यीशु मसीह के गुण

  यीशु मसीह के गुण   अगर आज हम इस दुनिया में देखें तो पता चलेगा कि लोग चीजों से ज्यादा से ज्यादा जुड़ते जा रहे हैं , और लोग परमेश्वर से दूर होते जा रहे हैं। अगर आप यीशु में विश्वास करते हैं तो आपको खुद से यह सवाल करना होगा कि क्या मैं चीजों से ज्यादा जुड़ा हुआ हू या मैं यीशु मसीह से अधिक जुड़ा हुआ हूं। यदि आप यीशु मसीह में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको परमेश्वर के वचन से उसके गुणों को सीखना होगा और उसे अपने जीवन में लागू करना होगा। इस ब्लॉग में हम यीशु मसीह के जीवन से 3 बहुत ही महत्वपूर्ण गुण सीखने जा रहे हे।   1. यीशु मसीह प्रार्थना करने वाले व्यक्ति थे। यदि हम परमेश्वर के वचन को पढ़ेंगे , तो हमें पता चलेगा कि यीशु अपना अधिकांश समय पिता के साथ बिताना पसंद करते थे , जो कि उनकी शक्तिशाली सेवकाई का रहस्य था। यीशु मसीह का अच्छा प्रार्थना जीवन सबसे मजबूत कारण था कि इस दुनिया में होने के बावजूद भी वो स्वर्गीय पिता की इच्छा को अपने जीवन के द्वारा पूरी कर सके। परमेश्वर के वचन लूका 6:12 मे लिखा हैं , तो ऐसा हुआ कि उस दिन यीशु पहाड़ पर प्रा...