यीशु मसीह के गुण
अगर आज हम इस दुनिया में देखें तो पता चलेगा कि लोग चीजों से ज्यादा से ज्यादा जुड़ते जा रहे हैं, और लोग परमेश्वर से दूर होते जा रहे हैं।
अगर आप यीशु में विश्वास करते हैं तो आपको खुद से यह सवाल करना होगा कि क्या मैं चीजों से ज्यादा जुड़ा हुआ हू या मैं यीशु मसीह से अधिक जुड़ा हुआ हूं।
यदि आप यीशु मसीह में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको परमेश्वर के वचन से उसके गुणों को सीखना होगा और उसे अपने जीवन में लागू करना होगा।
इस ब्लॉग में हम यीशु मसीह के जीवन से 3 बहुत ही महत्वपूर्ण गुण सीखने जा रहे हे।
1. यीशु मसीह प्रार्थना करने वाले व्यक्ति थे।
यदि हम परमेश्वर के वचन को पढ़ेंगे, तो हमें पता चलेगा कि यीशु अपना अधिकांश समय पिता के साथ बिताना पसंद करते थे, जो कि उनकी शक्तिशाली सेवकाई का रहस्य था।
यीशु मसीह का अच्छा प्रार्थना जीवन सबसे मजबूत कारण था कि इस दुनिया में होने के बावजूद भी वो स्वर्गीय पिता की इच्छा को अपने जीवन के द्वारा पूरी कर सके।
परमेश्वर के वचन लूका 6:12 मे लिखा हैं, तो ऐसा हुआ कि उस दिन यीशु पहाड़ पर प्रार्थना करने गया और सारी रात परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए बिताई।
एक विश्वासी होने के नाते हमें भी अधिक से अधिक समय प्रार्थना में बीताना चाहिए, और यह पहला गुण है जो हमे यीशु मसीह के जीवन से सीखकर अपने जीवन में लागु करना हे।
2. यीशु मसीह उपवास करने वाले व्यक्ति थे।
उपवास करना कठिन काम है इसलिए हमें उपवास नहीं करना है यह सच नहीं हे, मत्ती 4:2 मे लिखा है, यीशु मसीह ने चालीस दिन और चालीस रात तक उपवास किया।
उपवास का एक पहलू उस दिन भोजन का त्याग करना है और हम सभी इस पहलू को अच्छी तरह से जानते हे।
लेकिन उपवास का दूसरा पहलू भी हे जो हमे यशायाह 58:5 मे मिलता है, यहा परमेश्वर का वचन कहता हे जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं वह यह हे की जिस में मनुष्य स्वयं को दीन करे।
उपवास का सही अर्थ है खुद को परमेश्वर के सामने दीन करना और ऐसा उपवासी जीवन जिसमे हम खुद को दीन करे परमेश्वर हमसे मांग रहे हे।
3. यीशु मसीह क्षमा करने वाले व्यक्ति थे।
किसी को क्षमा करना एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है जो हम यीशु मसीह के जीवन से सीखते हे।
यदि हम लूका 23:34 को पढ़े तो यीशु ने यहा कहा, "हे पिता इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हे।"
येशु मसीह पिता को उन लोगो को क्षमा करने की बात कर रहे हे जिन्होने उस पर थूका और जिन्होने उसका मजाक बनाया।
यीशु मसीह ने अपने साथ हुए इस सारे अन्याय के बावजूद भी कोई अपराध नहीं किया, यीशु मसीह क्षमा कर सके कयोकि उन के पास एक क्षमा करने वाला हृदय था।
यदि आप भी यीशु मसीह में आगे बढ़ना चाहते हे तो आप उन सभी लोगो को क्षमा कर दीजिये, जिन्होंने आपके साथ गलत किया और आपका मज़ाक बनाया।
nice
ReplyDelete