तेरह का जीवन और महत्वपूर्ण सबक। आज हम तेरह के जीवन से महत्वपूर्ण सबक सीखेंगे ; अब्राम के पिता का नाम तेरह था और तेरह का अर्थ है देरी करना। अगर हमारा स्वभाव देरी करने का है तो हम अपने जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएगे , और जहा परमेश्वर हमे ले जाना चाहते हैं वहा हम नहीं पहुंच पाएगे। उत्पत्ति 11: 31-32 और तेरह अपना पुत्र अब्राम , और अपना पोता लूत , जो हारान का पुत्र था , और अपनी बहू सारै , जो उसके पुत्र अब्राम की पत्नी थी , इन सभी को लेकर कसदियों के ऊर नगर से निकल कनान देश जाने को चला ; पर हारान नामक देश में पहुँचकर वहीं रहने लगा। जब तेरह दो सौ पाँच वर्ष का हुआ , तब वह हारान देश में मर गया। यहां हम परमेश्वर की 3 इच्छा के बारे में सीखते हैं। 1. परमेश्वर की पहली इच्छा यह थी की वह नहीं चाहता थे कि तेरह कसदियों के नगर ऊर में रहे। 2. परमेश्वर की दूसरी इच्छा यह थी की वह तेरह को कनान देश में ले जाना चाहता थे। 3. परमेश्वर की तीसरी इच्छा यह थी की तेरह उस हारान देश पर अपना मन न लगाए जो कनान की और जाते समय रास्ते में आता था। मेरे प्यारे भाइ और ...
आध्यात्मिक मार्गदर्शन